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05.26.2007
 
तू सबसे सुंदर है
अशोक वशिष्ट

तू सबसे सुंदर है भारत, तू सबसे सुंदर है‚
तेरी धरती, यूँ पावन है, जैसे इक मंदिर है।

जहाँ भी जाओ, राम ही सुनता, और सुनता है सीता‚
जहाँ भी जाओ, कृष्ण ही गूँजे, और गूँजे है गीता,
तेरी काया, धर्म से महके, यों काशी शंकर है।
तेरी गोद में अर्जुन भी हैं, गोरख भी, गौतम भी,
तेरी गोद में हर मौसम है, सत भी, रज भी, तम भी,
तू हमको प्राणों से प्यारा‚ हर दिलके अंदर है।

गुरुओं ने तेरे दामन को, अपने ख़ून से धोया‚
भक्तों ने तेरे कणकण में, भक्ति प्रेम को बोया,
ऋषियों, मुनियों ने माना तू, जन्नत से बेहतर है।
तेरे एक इशारे पर हम, सबही मर सकते हैं
तेरी खातिर दुनियाँ क्या है, मौत से लड़ सकते हैं,
अपने चारों ओर देख ले, तू सबसे सुंदर है।

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