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09.04.2007
 
प्यार की मस्ती
अशोक वशिष्ट


स्वामी! तेरे प्यार ने मुझपे, जादू कर डाला है,
मेरे तनमन और जीवन को, खुदसे भर डाला है।

तेरे प्यार की मस्ती मुझपे, यूँ छाई रहती है,
जीवन को मदिरालय, हरपल मदिरा कर डाला है।

खुदको भूलने की आदत सी, अब बनती जाती है
देखो तुमने मुझको मुझसे, कैसे हर डाला है।

तन्हां और गुपचुप रहना ही, अब अच्छा लगता है,
तेरे प्यार ने मुझपे ऐसा, कुछ असर डाला है।

खुदसे बातें करता हूँ तो, लगता तुझसे करता,
खुदपे हँसने और रोने ने, मुझमें घर डाला है।

दुनियां मुझको पागल समझे, मैं दुनियां को समझूँ,
मैं जानूँ कि तुमने मुझको, खुदसे वर डाला है।


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