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12.20.2007
 
पागल भिखारी
अशोक गुप्ता

बाहर शोर हो रहा था
भीड़ जमा हो गई थी
सड़क पर एक भिखारी
या एक पागल चिथड़ों में

पड़ा था
क्या हुआ? सब पूछ रहे थे
कैसे मरा?

क्या कार से टक्कर हुई?
किसी बदमाश ने मारा?
या ड्रग की बहुतायत?
क्या प्यार मे पागल हो गया?
“नहीं नहीं!” उसका साथी बोला
“वह खामोशी थी”
वह अन्त तक चीखता रहा
“कुछ कहो! भगवान के लिए कुछ कहो!
कुछ भी!”


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