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07.02.2007
 
गलती मत करना
अशोक गुप्ता

जब तुम रेलगाड़ी से उतरो
तो रामधुन रिक्शावाले को पूछना,
कहना कि तुम्हें चौक जाना है,
उसको दो रुपये देना, ज्यादा नहीं।

जब तुम नदी पर पहुँचो
अपने जूते हाथ में ले लेना,
पेड़ के तने के पुल पर
रस्सी पकड़कर रखना,
नहीं तो भीग जाओगे।

कुछ दूर पगडंडी पर चलकर
तुम गाँव के चौक पहुँचोगे।
वैद्यजी को पूछना, उन्हें सब जानते हैं
क्योंकि वे सबको दवाई देते हैं ।
गाँव के लड़के तुम्हारे पीछे आएँगे
क्योंकि तुम्हारे शहर के कपड़े
उन्हें अजीब लगेंगे,
उन्हें आने देना।

यदि तुम मुझे अन्य लड़कियों के साथ
खेलते, या कुछ काम करते देखो,
तो न घूरना, न ही नाम से पुकारना,
वो चौंक जाएँगीं।

बस नज़र झुकाकर
तेज चाल से
घर की तरफ बढ़ जाना,
मैं पीछे से आऊँगी।

जब बाबा से मिलो
तो कुछ और बातें करना,
हमारे बारे में नहीं,
नहीं तो वे तुम्हें उद्दंड समझेंगे।

जब वे अग्रंज़ों के ज़माने
की बात करें,
तो प्रभावित दिखना,
और उन्हें और बताने को कहना।
यदि तुम यह सब करोगे,
और गलती नही करोगे,
तो वे तुम्हें मेरा हाथ
विवाह में दे देंगे।


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