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12.20.2007
 
भाग अमीना भाग
अशोक गुप्ता

(गुजरात २००२ नरसंहार जब २००० लोगो मारे गए ३०० महिलाओं का बलात्कार किया गया और २२००० लोग बेघर हुए)

मरे हुए लोगों को कभी भी आराम नहीं, खासकर रात को
कभी मैं ऊपरी मंज़िल पर उनको चलते सुनती हूँ
दरवाज़ों के कुंडे लगाते फर्नीचर खिसकाकर
दरवाज़े पर बैरिकेड बनाते
मैं सो नही पाती हूँ

कभी कभी गहरी खामोशी होती है
नारंगी रंग की सन्नाहट
सिर्फ़ चरमराहट की आवाज़
और जलने की बदबू
एकाएक वे चिल्लाने लगते हैं
“भाग अमीना भाग!”

मैं उनको समझाती हूँ
कि भीड़ कई सालों पहले चली गई
मुझे अब दर्द भी नहीं होता
और वे मर चुके हैं
पर वे चीखते जाते हैं
“वो आ रहे हैं
भाग अमीना भाग!”


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