अशोक गुप्ता


नई कविता

गुर्खा फोर्ट की हाइक
गलती मत करना
कैसे मैं समझाऊँ


कविता

उन दिनों
चीं भैया चीं
झूठ
दादाजी
पत्थर
माँ
रबर की चप्पल
रामला
वक्त के प्रवाह में
रेल्वे स्टेशन पर
पागल भिखारी
भाग अमीना भाग