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03.15.2017


वफ़ाएँ लड़खड़ाती हैं

वफ़ाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है
ज़रा-सी भूल से रिश्तों का धागा टूट जाता है

सलाखें देखकर घबरा रहा है तू परिन्दे क्यों
अगर शिद्दत से हो कोशिश तो पिंजरा टूट जाता है

परिन्दे वे कभी ऊँची उड़ानें भर नहीं सकते
ज़रा-सी धूप से जिनका इरादा टूट जाता है

हया आँखों की मर जाए तो घूँघट की ज़रूरत क्या
हया मर जाय तो हर एक परदा टूट जाता है

यक़ीं रखना तुम्हारी कोशिशें ही काम आएँगी
कि कोशिश रंग लाती हैं कि वादा टूट जाता है

लचक रहती है जिन पेड़ों में लम्बी उम्र जीते हैं
अड़ा रहने पे तूफ़ानों में क्या-क्या टूट जाता है


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