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08.26.2017


संवाद नहीं रहता

कौन, कहाँ,
कब, कैसे, क्या
ये याद नहीं रहता,
बहुत दिनों तक
जब यारो
संवाद नहीं रहता!

जितने भी हों मीठे पल
सब धुंधला जाते हैं,
यादों के सब कमल धूप में
कुम्हला जाते हैं,
वो मिलकर
बतियाने का
उन्माद नहीं रहता!
बहुत दिनों तक
जब यारो
संवाद नहीं रहता!

हँसी-ठिठोली, गप्पबाज़ियों
वाले हिस्सों को,
छल जाती है चाल समय की
सारे क़िस्सों को,
रिश्तों का
वो मधुवन फिर
आबाद नहीं रहता!
बहुत दिनों तक
जब यारो
संवाद नहीं रहता!


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