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ISSN 2292-9754

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06.01.2017


हे देव!

फिर कहीं चिता जली
और अलाव बनी
उस मरे बूढ़े की देह पे
कुछ और बूढ़े
हाथ सेंकते हैं
जीने की कोशिश में
देख ज़रा विवशताओं
का मकड़जाल
सुलझा ज़रा

मेरे अंतस में क्यों छुपा बैठा है तू
बाहर आ देख
ये बाज़ार, मायावी ये मंडी
और देख
यहाँ अरमानों को,
सिद्धान्तों को,
सपनों को,
आदर्शों को,
नीलाम होते
फिर बताना मुझे
कहाँ गया तेरा
देवत्व


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