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ISSN 2292-9754

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11.01.2016


एक पुख़्ता सवाल

पंद्रह साल की ज्योति के लिए पैंतीस साल के रामसजीवन का रिश्ता आया था। पहली पत्नी प्रसूति के समय चल बसी थी। ज्योति ने अपनी माँ से कहा, "अम्मा अभी तो हमारी उम्र भी नहीं हुई, फिर जल्दी किस बात की है?"

उसकी माँ ने जवाब दिया, "बिटिया हम गरीबों की छाती से बेटी का भार जितनी जल्दी उतर जाए अच्छा है।"

अपनी माँ का जवाब उसके दिल में चुभ गया "क्यों अम्मा घर के हर काम में मैं हाथ बटाती हूँ। तुम्हारे साथ बापू का हाथ बंटाने खेत पर भी जाती हूँ, फिर मैं भार कैसे?"

उसकी माँ सवाल सुनकर मौन थी।


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