Sahitya Kunj - आशा पाण्डेय - Asha Pandey

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ISSN 2292-9754

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04.26.2017


अम्मा तेरे हाथ

कितने नरम तुम्हारे हाथ मेरी प्यारी अम्मा जी,
भाता मुझे तुम्हारा साथ मेरी प्यारी अम्मा जी।

इन हाथों से थपकी देकर जब तुम मुझे सुलाती हो,
मुझे नींद गहरी आ जाती सपने में तुम आती हो।

दूध भात से भरा कटोरा लिए हाथ में आती हो,
मुन्ना राजा बोल-बोल कर पूरा मुझे खिलाती हो।

खा पीकर मेरी अम्मा मैं यहाँ-वहाँ छिप जाता हूँ,
बोल-बोल कर अम्मा-अम्मा तुमको खूब छकाता हूँ।

पहले तुम हँस देती हो पर फिर गुस्सा हो जाती हो ,
ढूँढ़-ढूँढ़ कर मुझको अम्मा तुम कितना थक जाती हो।

जब तुमको मिल जाता हूँ तब डाँट तुम्हारी खाता हूँ,
अम्मा तेरे डर के मारे मैं झट से उठ जाता हूँ।

सपना कहीं भाग जाता है तुमको गले लगाता हूँ,
इन प्यारे हाथों को अपने सिर के ऊपर पाता हूँ।


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