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| 05.07.2008 |
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जीवन की साँझ |
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जीवन की साँझ का प्रहर बयार मंद मंद है यह समय भला भला, जीवन का नया मोड़ है काम का न बोझ है जब जो खुशी वही करो चाहे जहाँ चले गये न सर पे मेरे ताज है तन थका न क्लान्त है दिन रात तेरा साथ है जो मिल गया प्रसाद है बगिया की हर कली खिली मकरन्द जो बिखर गया, आज तुम जी भर जियो कल की कल पे छोड़ दो |
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