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ISSN 2292-9754

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05.18.2016


तमगा

"जी आपका नाम",
उसने पूछा,

"अरविन्द" मैंने बताया,

"जी पूरा नाम"

"नाम भी आधा हुआ है कभी"

"हा हा हा बड़े बातूनी हैं आप
उपनाम क्या हुआ?"

"जी बस नाम ही है
उपनाम ढोने की ताक़त बची नहीं"

"हा हा हा अच्छा किस जात के हो"

"जी आदम जात"

"आदम! कभी सुना नहीं"

"ग़लती आपकी नहीं साहब,
रिवाज़ शब्द ही कुछ ऐसा है।"


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