अरविन्द चौहान


कविता

अमावस को हरने फिर ...
उन्मुक्त तरंग
खलिहान
प्यार तुमसा त्याग ....
बरसे सावन अब...
याद आते हैं वे खेत और
यूँ मिली खुशी
यूँ साथ चलते चलते
वो आँगन का गुलमोहर...
होली.... रंगो का त्यौहार

आपबीती/संस्मरण

एक अनुभूति... मेरी अनुभूति