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07.02.2014


दोस्ती

दोस्ती अगर प्यार से हो तो
बन जाती है कितनी ही बातें,
दोस्ती अगर नफ़रत से हो तो
मिट जाती है कितनी माँगें।

दोस्ती अगर पैसे से हो तो
आदमी वहशी दरिन्दा बनेगा,
दोस्ती अगर इंसा से हो तो
जनम भर का साथ निभेगा।

पर आज किस पर करें भरोसा ?
कौन अपना है यहाँ
दोस्त ही दोस्त का दुश्मन बना है
मुखौटों का है कारवां।

गर दोस्ती करनी ही हो तो
पहले ख़ुद के दोस्त बनो,
और अगर लड़ना ही हो तो
अपनी बुरी आदतों से लड़ो।

तभी स्वस्थ समाज पनपेगा
आशा का नया सवेरा होगा,
तभी कीचड़ मे रह कर भी
नया कमल का फूल खिलेगा।


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