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ISSN 2292-9754

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01.30.2017


पाठशाला से जब घर जाते बच्चे

मेघ देख शोर मचाते बच्चे,
पाठशाला से जब घर जाते बच्चे।

छप-छप पानी में कूद लगाते
कीचड़ में ख़ुद को डुबोते
रिम-झिम बारिश की बूँदों में
झूम-झूम कर हॅंसते गाते।
पाठशाला से जब घर जाते बच्चे।

मोर पंख से रंग-बिरंगे
सपने इनके बाहर निकलते
कपड़ों की न चिंता करते
दौड़ भाग कर धूम मचाते।
पाठशाला से जब घर जाते बच्चे।

पापा-मम्मी की एक न सुनते
हरदम अपने दिल की करते
तन मन अपना ख़ुशियों से भरते।
पाठशाला से जब घर जाते बच्चे।


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