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ISSN 2292-9754

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04.19.2015


बस प्यार-प्यार वो प्यार है

है पागल दीवाना लेकिन वो ख़ुशियों का सार है
और भला क्या कहूँ उसे, बस प्यार-प्यार वो प्यार है

मुझको जीना सिखलाती हैं
उसकी भोली बातें
दिन उजला-उजला लगता है
दिलकश लगती रातें
वो दिल के आँगन का उत्सव, वो मेरा त्यौहार है
और भला क्या कहूँ उसे, बस प्यार-प्यार वो प्यार है

पूरा करके ही छोड़े वो
जो ज़िद पर अड़ जाये
बिना ख़ौफ़ हर मुश्किल-अड़चन-
बाधा से लड़ जाये
साधारण सा दिखता है पर बहुत बड़ा फ़नकार है
और भला क्या कहूँ उसे, बस प्यार-प्यार वो प्यार है

दिल में सागर लिए प्यार का
मर्यादा में रहता
किसी क़सम से अधिक निभाता
जो ज़ुबान से कहता
मित्र-सखा-सहचर है मेरा वो मेरा संसार है
और भला क्या कहूँ उसे, बस प्यार-प्यार वो प्यार है


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