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ISSN 2292-9754

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04.19.2015


बाजे मृदंग जैसे

बजे जल-तरंग, सजे अंग-अंग, छाया अनंग जैसे
मन का वो हाल, तबले की ताल, बाजे मृदंग जैसे

सुख के हिंडोले मनवा ये डोले
चिंतायें सारी भूले
जीवन निसार तुझपे है यार
मुझे एक बार छू ले
वीणा के तार, गूँजे सितार, मन है मलंग जैसे
बजे जल-तरंग, सजे अंग-अंग, छाया अनंग जैसे

हर एक थाप करती है जाप
प्रिय मेरा प्यार तुम हो
मुरली की तान तुम मेरे प्राण,
जीवन का सार तुम हो
डमरू के बोल, बजे झाँझ-ढोल, चढ़ती तरंग जैसे
बजे जल-तरंग, सजे अंग-अंग, छाया अनंग जैसे

बस तेरी प्रीत जाऊँ मैं जीत
मेरे मन के मीत सुन ले
बजने दे शंख, खुलने दे पंख , आ प्रणय गीत चुन ले
सुर गीत साज़, लगते हैं आज, बढ़ती उमंग जैसे
बजे जल-तरंग, सजे अंग-अंग, छाया अनंग जैसे


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