अर्चना पंडा

कविता
इश्क़ कभी भी लफ़्ज़ों का
दर्पण हूँ मैं
देखो मेरी आँखों में
बस प्यार-प्यार वो प्यार है
बाजे मृदंग जैसे
कहानी
अपना भी कोई एक घर होगा
कभी कान्धा भीगा है आपका