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06.03.2012

लघु बिरवा

अरे! संभ्रांत बरगद तूने
अपनी छाया में,
कितने बिरवों को रोक दिया
अम्बर छूने से?

तेरी चौड़ी छाती वाले
पत्र तने-से खड़े हुए हैं,
सूरज की उज्ज्वल किरणों पर
कितने पहरे पड़े हुए हैं।

एक किरण उजली सूरज की
महादान कर इन बिरवों को।
जीने दे, पलने दे, बढ़ने दे
आसमान तक इन बिरवों को।

धरती का सारा पावन जल,
पीकर तू, पा गया अमरता।
कुछ बूँदें तू शेष बचाकर
अमर दान कर इन बिरवों को।

यथोचित सत्कार-मान दे
सदियों से शोषित बिरवों को।


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