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04.16.2012

कौतूहल

कौतूहल : एक स्रोत
प्रश्न : एक बहाव
खोज : एक निकास
विवेक
भाव
उत्तर
निदान
बस एक उछाल !!

किसी लहर का द्वीप की ओर
पकड़ने अज्ञात छोर।

अपने मुहाने ख़ुद बनाती है धार -
रेत को उठाकर
बैठाकर
बहाकर
टकराकर
बिखराकर !

एक हिलोर पर हिलोर
क्षण-क्षण की डोर -
हवा को नदी की चादर पर समतल करती,
अपने आवेग के साथ ले जाती -
बस एक सतत प्रवाह
अविराम ! अविराम ! अविराम !

शिलाओं पर सिर धरकर
पूजती
अर्घ्य देती
समय को चिह्नित करती
निकल जाती है
प्रगल्भा !

पीछे रह जाता है
पनार का बाँकपन
दहाना
उत्स
और
एक कौतूहल
प्रश्न
खोज
विवेक, भाव, उत्तर, निदान
और
समय का फेंका उछाल!!


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