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ISSN 2292-9754

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11.24.2014


उहापोह

प्रतिबिम्बों की भीड़
उपजते भ्रम
हम सभ्रम
स्वप्नों के सम्मोहन में उलझे
अक्सर
यथार्थ से-
परे हो जाते हैं और
हतप्रभता की
नीरवता में
खो जाते हैं


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