अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
11.25.2014


क्योंकि अब समय आ गया है बदलाव का

ऐ भारत के लोगो, तुम एक हो कर आओ
एक साथ में तेज़ स्वर में, हुँकार लगाओ
कि जो रह रहे हैं घनघोर अराजक अँधेरों में
भ्रष्ट दलदल में लिपटे कलुषित चेहरों में
वो जागें और हाल लें समाज के आभाव का
क्योंकि अब समय आ गया है बदलाव का

कलम के सिपाही, आलोचकों की स्याही
इतिहास के पन्नों ने फिर आवाज़ लगाई
उठा के कलम फिर बारूद बनाओ
अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाओ
अंत करो राजनीति में ग़फ़लत के पड़ाव का
क्योंकि अब समय आ गया है बदलाव का

नेता और उच्चासीन भी अब ध्यान दे
सामाजिक अर्थव्यवस्था को सम्मान दे
इससे पहले के भीड़ कोई बवाल करे
जा कर उनसे उनकी ज़रूरत के सवाल करे
नहीं तो फिर कोई उपाय न होगा बचाव का
क्योंकि अब समय आ गया है बदलाव का

लकीरें अब खिंच चुकी हैं, फैसलों की
घड़ी में ज़रूरत है बस हौसलों की
जो आज हार रहा है वो कल जीतेगा
समय के साथ अराजक दौर भी बीतेगा
कभी यहाँ किसी को मौका नहीं मिला ठहराव का
क्योंकि अब समय आ गया है बदलाव का


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें