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| 03.06.2009 |
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पहचान - अपनी |
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तुम लोग हमें क्या समझोगे, हमें समझा आग और पानी ने। हमने तो कभी जाना ही नहीं, कब दिन डूबा और साँझ हुई। वर्षों की लम्बी कठिन डगर, तय हो चुकने को आई है। दुनिया को अपनी प्यार किया, जैसी भी है, यह अपनी है। |
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