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08.17.2008
 

बहुत दिनों बाद
अनुला


बहुत दिनों बाद आज सरसों फिर फूली है,
हरियाली खेतों में रस्ता फिर भूली है,
हरियाली चूनर के पीत रंग बूटों पर मेरा मन अटका है,
बहुत दिनों बाद
बहुत दिनों बाद.....
बहुत दिनों बाद आज बेला फिर महका है,
कानन के बीच बीच टेसू फिर दहका है,
ख़ुशबू के झोंकों से, रंगों के पंखों पर मेरा मन भटका है,
बहुत दिनों बाद
बहुत दिनों बाद.....
बहुत दिनों बाद आज अमराई बौराई,
बौरों के बीच बीच कोयल फिर कुहकाई,
कोयल की कूकों से हूक उठी अन्तर में, काँटा सा खटका है,
बहुत दिनों बाद
बहुत दिनों बाद.....
बहुत दिनों बाद आज आँखें फिर भीगी हैं,
अन्तस्‌ में चुभ आईं यादें कुछ तीखी हैं,
यादों की ठेसों से पत्थर सा मेरा मन शीशा बन चटका है,
बहुत दिनों बाद
बहुत दिनों बाद.....


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