स्वतंत्रता अंशु जौहरी
मैं कह रही हूँ कुछ इस बात से बेपरवाह कि मुझे कोई सुन रहा है कि नहीं मैं पूछती हूँ प्रश्न इस बात से लापरवाह कि मुझे उत्तर मिलेंगे कि नहीं मैं खोजती हूँ उत्तर यद्यपि प्रश्न पूछे ही गये थे मुझसे यह एकाकी मन का संवाद यह गुत्थियों का सुलझना-उलझना यही क्या संघर्ष है? और स्वतंत्रता भी....