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02.09.2008
 

स्वतंत्रता
अंशु जौहरी


मैं कह रही हूँ कुछ
इस बात से बेपरवाह
कि मुझे कोई सुन रहा है कि नहीं

मैं पूछती हूँ प्रश्न
इस बात से लापरवाह
कि मुझे उत्तर मिलेंगे कि नहीं

मैं खोजती हूँ उत्तर
यद्यपि प्रश्न पूछे ही गये थे मुझसे
यह एकाकी मन का संवाद
यह गुत्थियों का सुलझना-उलझना
यही क्या संघर्ष है?
और स्वतंत्रता भी....


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