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02.09.2008
 

मैं चुप हूँ
अंशु जौहरी


मैं चुप हूँ
क्यूँकि सुन रही हूँ अभी
इस डर से नहीं कि शोर में
गुम हो जायेगी आवाज़ मेरी

मैं चुप हूँ
क्यूँकि नहीं चाहती कि आवाज़ मेरी
शोर का हिस्सा बन जाये
क्यूँकि फ़र्क होता है शोर में
आवाज़ के गुम होने
और उसका हिस्सा बनने में

मैं चुप हूँ
क्यूँकि बच्चा है कहकर
तुम बोलने तो दोगे
पर “नवजात है विषय” मेरे
कह कर,
कर दोगे मुझे अनसुना

मैं चुप हूँ
क्यूँकि पढ़ रही हूँ ज़िन्दगी को
दे रही हूँ उसके इम्तिहान
अनुभव से अलग हट कर कहने के लिये
जुटा रही हूँ अनुभव मैं

मैं चुप हूँ
क्यूँकि सुलझाने में लगी हूँ
पहेलियों से बुझे कुछ गूढ़ अर्थ
इसलिये नहीं कि गूँगी हूँ

मैं चुप हूँ
क्यूँकि सुन रही हूँ अभी।


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