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ISSN 2292-9754

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05.09.2016


वीर

(छंद: मनहरण घनाक्षरी)

अरि रूंड शुंड गिरे,
भाला चहुँ ओर फिरे।
चेतक सवार राणा,
रिपुदल मारे हैं।

रण ये प्रचंड एक
एकलिंग रहे देख
काट काट बैरी भाल
वीर ललकारे हैं॥

सब जोश आज भर
रक्तिम शृंगार कर।
धरा के सपूत मिल
करें जयकारे हैं॥

"अनमोल" आन बान
देखो मेवाडी ये शान
हर एक वीर आज
शत्रु को संहारे हैं॥


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