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ISSN 2292-9754

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03.23.2016


नव प्रभात

नई नवेली दुल्हन सी
नव प्रभात की नवल किरण
आलोकित अवनि को करती
शैने:-शैने: समीर संग
आ पहुँची अब आँगन में

गुंजित गीत गुलशन में करते
मधुर मिलंद मन मचा उन्माद
पल पल प्रत्युषपान का पल्लव
कर रहे कब से इंतज़ार

नहीं निशा का रहा नशा अब
कोमल कोमल किसलय पर
मंद-मंद मदमस्त पवन में
तीर तडाग के तरुवर पर॥

ज्यों-ज्यों फैल रही ज्योति
उमंग उठ रही अंतस में
करो कर्म कर्तव्य पथ पर
सदा स्नेह सच सीने में।


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