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ISSN 2292-9754

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08.27.2016


किसान

हुजूर,
मेहनत हमारी
खेत हमारे
फसल हमारी
और,
दाम तुम तय करो
यह तो नाइंसाफी है
अन्नदाता !

अन्नदाता,
अन्न हम पैदा करें
और
अन्नदाता तुम बनो
पीढ़ियों से तुम
हमें अपना नमक खिलाते रहे
हमने नमक हरामी नहीं की
परंतु,
अब हम नमक आपका नहीं खाते।
अब नमक आप हमारा खाते हो,
और
नमक हराम हमें कहते हो !

माई-बाप,
रहम करो
खेतों को
पानी नहीं
बिजली नहीं
फसल नहीं
हमारे पास
सिर्फ कर्ज़ हैं
कर्ज़ से लदे हम
अपने बच्चों को
‘क’ से किसान नहीं
‘क’ से कर्ज़ पढ़ाते हैं।

मालिक,
हमारी गायें कटवा दीं
हमारे बैल बिक गये
हमारे पास नहीं बचा गोबर, खाद
हमारे खेत आश्रित हो गये
रासायनिक उर्वरकों के
कृत्रिम साधनों के।

दरबार,
आपके अधम चाकरों ने
अधम कर दी उत्तम खेती
हमारे खेत रहन हो गये
हमारे सपने दफन हो गये
हम बचे हैं
जीवित लाशों की तरह
फांसी पर लटकने के लिए।

हुकुम !
हम पर दया करो
हमारी पुकार सुनो
हमें हमारी गायें लौटा दो
हमें हमारे बैल वापिस दे दो
हमें नहीं चाहिए
ट्रेक्टर पर कर्ज़
वोट की इतनी बड़ी कीमत।

हम मतदाता हैं
हम अन्नदाता हैं
हमे मजबूर मत करो हॅसिया उठाने के लिए।


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