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| 03.15.2009 |
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उनके लिये तो वो होली का गुलाल है!
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शाम-ओ-सहर शाह-ए-मग्रिब शाहिद-ए-हाल है, बेगोरोकफ़न हुआ हूँ तेरे इश्क़ में ऐ रक़ीब, |
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