तेरे अधर ! डॉ. अनिल चड्डा
अधरों पर तुम्हारे प्यार के कुहासे छाए हैं कोई मुस्कराए तो कैसे ?
जीवन का हर क्षण तुम्हारा नाम गुनगुनाए है कोई मर जाए तो कैसे ?
कलियों औ' भौरों की गुपचुप से मन शर्माए है कोई कुछ बतलाए तो कैसे ?
उनके कदमों की आहट पर हमने कान लगाए हैं कोई छिप जाए तो कैसे ?
रीता मन हरदम उन्हें अपने पास बुलाए है कोई गीत गाए तो कैसे ?