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05.03.2012
 

तेरे अधर !
डॉ. अनिल चड्डा


अधरों पर
तुम्हारे प्यार के कुहासे छाए हैं
कोई मुस्कराए तो कैसे ?

जीवन का हर क्षण
तुम्हारा नाम गुनगुनाए है
कोई मर जाए तो कैसे ?

कलियों औ' भौरों की
गुपचुप से मन शर्माए है
कोई कुछ बतलाए तो कैसे ?

उनके कदमों की आहट पर
हमने कान लगाए हैं
कोई छिप जाए तो कैसे ?

रीता मन
हरदम उन्हें अपने पास बुलाए है
कोई गीत गाए तो कैसे ?


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