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11.16.2014


मेरी लाडली

मेरी लाडली, मेरे घर में सपने सा था वो तेरा बसेरा,
तू रोशनी ज़िन्दगी की थी, अब चंहु ओर अँधेरा!

दिन होता था मेरा पूरा, मस्तक चुम्बन से तेरे,
मीठी तेरी मुस्कान से आता था सवेरा!

हर बात में तू ही तू थी, तेरी हर बात निराली,
तू दूर है मुझसे, पर आँखों में बसता तेरा ही चेहरा!

वो हँसी, वो गुस्सा और वो तेरे नखरे न्यारे,
अब कौन रूठे मुझसे, तुझ बिन कौन है मेरा!

खुश रहना, खुशियाँ बाँटना, बस धीरज तुम सहना,
कोई रूठेगा नहीं तुझसे, होगा दुश्मन भी तेरा!!

आँखों में आँसू, तुझ बिन दिल रोता है मेरा,
तुम सुखी रहो मेरी लाडली, नया संसार हो तेरा!

- मेरी प्यारी बेटी शुचि को अपना नया संसार बसाने के अवसर पर समर्पित –
- डा० अनिल चड्डा


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