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02.27.2014


मेरे बिन तुम कहाँ हो

मैं हूँ
तो तुम हो
मुझसे ही तो
सारा जहाँ है
मैं न रहूँ
तो मेरे लिये
तुम्हारा
या
किसी और का भी
वजूद ही कहाँ है
इ्सीलिये तो कहता हूँ
मेरे बिना
न रहें खुशियाँ
न रहें ग़म
न रहो तुम
न रहें हम
पर मेरे बाद
तुम्हारे लिये तो
मेरा अस्तित्व रहेगा ही-
बेशक ख्यालों में ही-
मुझे मेरी
अच्छाईयों-बुराईयों के कारण
याद तो करोगे ही
और शायद सोचोगे
कि काश मैं होता
जिससे तुम
मन की बात कह पाते
पर तब
मैं नहीं होऊँगा
तुम्हारे अस्तित्व की
सम्पूर्णता के लिये
इसलिये
स्वीकार कर लो
कि मैं हूँ तो
तुम हो
मेरे बिन
तुम्हारा या किसी और का
वजूद ही कहाँ है !
वजूद ही कहाँ है !!


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