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05.23.2017
 

मैं दर्द पिया करता हूँ !
डॉ. अनिल चड्डा


मैं दर्द पिया करता हूँ, मर-मर के जिया करता हूँ,
फिर भी इस दुनिया को, लहू अपना दिया करता हूँ !

सब संगी-साथी छूटे, अपने थे जो वो रूठे,
मन में जो बातें आयें, मैं ख़ुद से किया करता हूँ !

कोई वक़्त न ऐसा आये, तुझको न याद दिलाये,
अब तो मैं ख़ुदा के बदले, तेरा नाम लिया करता हूँ !

रुसवा तुझको नहीं करना, चाहे पड़ जाये मुझे मरना,
कोई जान न पाये दिल की, ले होंठ सिया करता हूँ !

मौसम है बदला-बदला, बदली-बदली हैं निगाहें,
पा लूँ मैं निशाँ जहाँ तेरा, वो राह लिया करता हूँ !


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