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ISSN 2292-9754

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08.25.2016


जीवन का ज्ञान

काँटों भरा जीवन न मान,
बनेगा सपनों की ये उड़ान!

हर पथ में काँटे मिलते हैं,
कुछ रुकते हैं, कुछ चलते हैं,
जो चलते हैं, वो बढ़ते हैं,
जो डरते हैं, वो रुकते हैं,
अपने अंदर को पहचान!

बादल जब-तब घिर आते हैं,
और, कईं तूफ़ां आते हैं,
जो नहीं इनसे घबराते हैं,
राह वही अपनी पाते हैं,
तू है नहीं अलग इन्सान !

बीते कल को मत रोना तू,
आने वाला कल न खोना तू,
कल क्या होगा, सोच-सोच कर,
दिल पर भार नहीं ढोना तू,
जीने का बस एक ही ज्ञान!


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