| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 04.04.2008 |
|
आईने ने सुना दी कहानी मिरी |
|
आईने ने सुना दी कहानी मिरी जाने क्या बात थी सोचते ही जिसे बात पहुँची मिरी उसके होंटों तलक वो जहाँ भी था अपना समझता मुझे बेतलब बेसबब मुस्कुराती हुई तुझसे बिछुड़ी हूँ लेकिन मैं तन्हा नहीं |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|