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04.04.2008
 

आईने ने सुना दी कहानी मिरी
अनन्त कौर


आईने ने सुना दी कहानी मिरी
याद मुझ को दिलाई जवानी मिरी

जाने क्या बात थी सोचते ही जिसे
रुक गई धड़कनों की रवानी मिरी

बात पहुँची मिरी उसके होंटों तलक
काम आई मिरे बेज़बानी मिरी

वो जहाँ भी था अपना समझता मुझे
बात इतनी भी कब उसने मानी मिरी

बेतलब बेसबब मुस्कुराती हुई
वो थी तस्वीर शायद पुरानी मिरी

तुझसे बिछुड़ी हूँ लेकिन मैं तन्हा नहीं
अब मिरे साथ है रायगानी मिरी


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