अनन्त कौर


ग़ज़ल

तिरे ख़्याल के साँचे में ढलने वाली नहीं
आईने ने सुना दी कहानी मिरी

समीक्षा

“रायगाँ नहीं हूँ मैं” -- एक नज़र - सुमन कुमार घई