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ISSN 2292-9754

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10.16.2014


बिकने वाले

स्थानीय निकाय चुनाव में अग्रवाल जी दूसरी बार प्रधान बने तो वोटरों की खरीद फरोख़्त के आरोपों प्रत्यारोपों के बीच बधाइयों का सिलसिला शुरू हुआ। लोग आ कर बधाइयाँ दे रहे थे। इसी सिलसिले में एक सज्जन ने आ कर बधाई के साथ-साथ मज़ाकिया अन्दाज़ में कहा, "प्रधान जी आपको बहुत-बहुत बधाई, लेकिन हम आपको प्रधान नहीं मानते, क्योंकि हमने सुना है कि आप वोटरों को खरीद कर धन के बल पर प्रधान बने हैं।"

"बधाई के लिए हम आपका तहदिल से आभार प्रकट करते हैं। रही बात वोटरों को खरीदने की तो आप स्वयं ही समझदार हैं, हम तो किसी को क्या खरीदेंगे और फिर बिकने वाले वोटर होते ही कितने हैं? ज़्यादा से ज़्यादा दस प्रतिशत ! जनाब, यदि सारे ही बिकने वाले होते तो आज डॉ. मनमोहन सिहं के स्थान पर टाटा बिरला या अंबानी बंधुओं में से कोई एक प्रधानमन्त्री होता," अग्रवाल जी ने जवाब दिया।

अग्रवाल जी के इस जवाब से वे सज्जन तो सहमत हुए ही मगर सुनने वाले भी सोचने पर मजबूर हो गये।


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