अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
03.16.2016


दुःख तो ज़रिया है

मुझे पता है,
तुम मुझे दुःख देकर दुखी हो।
मैं जानता हूँ
तुम मेरे आस-पास यहीं कहीं हो।

मालूम है, दुःख तो ज़रिया है तुम्हारा
रखने को पास लगता जो प्यारा।
दुःख ही है सरल साधन
दुःख में रहे तेरा स्मरण।

पर जब-जब तुम दुःख देते हो
सोचता हूँ, मेरे साथ ही क्यों?
मगर मालूम जिन्हें तुम चाहते हो
उनको ही लीला दिखाते हो।
तुम लेते हो परीक्षा प्रतिपल
करते दुःख दूर, होते जो सफल।

लेकिन दुःख तो ज़रिया है
तुहारे पास रहने का।
इसलिए हे ईश! दुःख चाहे दूर करना
मगर अपने से दूर न करना।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें