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| 10.20.2007 |
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रोशनी
हिज्र की इस रात में कुछ रोशनी आ रही,
एक हादसा एक ज़ख़्म और एक टीस दिल के पास थी,
नज़र के आसमान से है चला गया सूरज कहीं,
मिल गई है इसमें एक बूँद तेरे इश्क़ की,
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रोशनी हिजर
दी इस रात विच्च कुझ रोशनी आऊँदी पई इक हादसा इक
ज़ख़्म ते इक चीस दिल दे कोल सी
नज़र दे असमान
तों है तुर गया सूरज किते,
रल गई सी ऐस
विच्च इक बूँद तेरे इश्क़ दी, |
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