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10.20.2007
 

रोशनी
अमृता प्रीतम
पुस्तक
चोणवी कविता में से साभार

हिज्र की इस रात में कुछ रोशनी आ रही,
क्या फिर बत्ती याद कुछ ओर ऊँची हो गई।

एक हादसा एक ज़ख़्म और एक टीस दिल के पास थी,
रात को यह तारों की रकम गुणा दे गई।

नज़र के आसमान से है चला गया सूरज कहीं,
चाँद में  से पर उस की ख़ुश्बू अभी आ रही।

मिल गई है इसमें एक बूँद तेरे इश्क़ की,
इस लिये मैं ने उम्र की सारी कड़वाहट पी ली।

 

 

रोशनी
अमृता प्रीतम
पुस्तक
चोणवी कविता में से साभार

हिजर दी इस रात विच्च कुझ रोशनी आऊँदी पई
की फेर बत्ती याद दी कुझ होर उच्ची हो गई

इक हादसा इक ज़ख़्म ते इक चीस दिल दे कोल सी
रात नूँ
इह तारिआँ दी रकम ज़रबाँ दे गई

नज़र दे असमान तों है तुर गया सूरज किते,
चन्न विच्च पर ओस दी ख़ुशबू अजे औंदी पई

रल गई सी ऐस विच्च इक बूँद तेरे इश्क़ दी,
इस लई मैं उम्र दी सारी कुड़त्तन पी लई



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