अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
03.06.2017


क्या आपने देखा है...?

प्रेमी-प्रेमिकाओं के आपसी मिलन
विरह-वेदना, जीवन-मरण से संबंधित
एक स्थान से दूसरे स्थान तक
संवाद पहुँचाने वाले
सफ़ेद, काले, भूरे
चितकबरे पंखों वाले कबूतरों को
पिछले कई वर्षों से
क्या आप ने देखा है ?

क्या आपने देखा है
बड़े-बड़े योद्धाओं,
शूरवीरों के दिलों पर
राज करने वाले
उनके इशारा मात्र से
दुश्मनों को, छठी का दूध याद करा देने वाले
आकार में छोटे किन्तु फ़ुर्तिले व आक्रामक
उन शिकारी बाजों को
जिनकी वीरता की कहानियाँ ही जीवित रह गयी हैं शेष?

अपने होने के अर्थ में
सिक्खों के अंतिम गुरु की हथेली पर
प्रतीक स्वरूप जो विराजमान है आज भी?

क्या आपने देखा है
खत्म हो चुकी घोड़ों की उन प्रजातियों को
जिनकी पीठ पर सवार हो
महाराणा, शिवाजी, लक्ष्मीबाई, कुँवर सिंह
उनके सरीखे अन्य योद्धा
जीत लिया करते थे बड़ी-बड़ी लड़ाइयाँ?

दुश्मन देश के सूरमा
जिनकी टॉप पर
डाल दिया करते थे अपना-अपना हथियार
विवश होना पड़ता था जिन्हें ज़िन्दगी की भीख माँगने को?

नहीं देखे जा रहे वे सारे जानवर, पशु-पक्षी
बची-खुची ख़ूबियाँ बॉटने वाले अन्य प्राणी
मनुष्य की पाशविक प्रवृत्तियों से आजिज़
शनैः शनैः जो तोड़ रहे अपने प्राण।

आम के पेड़ पर कुहुक-कुहुक करती कोयल
किसी के आने की सूचना देता
घर की मुँडेर पर
अल-सुबह काँव-काँव करता कौआ
राम-नाम की रट्ट लगाता लाल चोंच वाला तोता
पहाड़ी मैना, बुलबुल, गिलहरी
नहीं देखे जा रहे इन दिनों यत्र-तत्र।

सड़े-गले प्राणियों का भक्षण कर
पर्यावरण को सुरक्षित, सवंर्धित रखने वाले
गिद्ध, चील, गरुड़ तेज़ी से खोते जा रहे
अपनी-अपनी पहचान।

उन उल्लुओं को भी नहीं बख़्शा जा रहा
लक्ष्मी की सवारी के रूप में अब तक
जो पाता रहा है घरों में इज़्ज़त
संभोग क्रिया में शक्तिवर्धक दवाईयों के लिये
उँची क़ीमत की लगायी जा रही जिनकी बोली
तलाशे जा रहे प्रतिदिन नदी, जंगल, पहाड़ों पर जो अनवरत।

कितनी तेज़ी से बदल रही दुनिया
बदल रहा मानव का स्वभाव, विचार, जज़्बात
प्राणियों के प्रति असंवेदना!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें