अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली

मुख पृष्ठ
02.27.2014


हर तरफ़, हर जगह बिखरे

हर तरफ़, हर जगह बिखरे।
तेरे ही अंदाज, तेरे ही नखरे।।

हवायें ख़ुदबख़ुद बता देती हैं तेरा पता।
तू जहाँ रहे, तू जहाँ से गुजरे।।

ख़ूबसूरत है वो इतना कि क्या कहें हम ।
फूल शरमा जाए, चाँदनी झुका ले नज़रें।।


तितली बादल फूल परिंदे, सब अच्छे हैं लेकिन।
किस में है दम, कौन तेरे आगे ठहरे।।

सादगी पे तेरी दिल दिया है वरना।
हमने भी देखे हैं ज़ालिम, कई हसीन चेहरे।।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें