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08.01.2014


सिंहासन सो रहा है

 अंधियारों से करे दोस्ती और चैन की नीद सोये
कोई कह दे दबी दूब से शबनमी न रोने रोये
सिंहासन सो रहा है

पांखों को करे काला, न रंगों की सरिता बहाये
कोई कह दे तितली से उपवन कभी न जाए
सिंहासन सो रहा है

किलकारी भूल जाएँ महतारी भूल जाएँ
दूधमुंहियों से कह दे पलनों में सहम जाएँ
सिंहासन सो रहा है


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