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03.31.2015


शास्त्र पर सम्वाद जो चाहा

शास्त्र पर सम्वाद जो चाहा
शस्त्रों पर वो आ गए
अनचाहे अनगढ़े सुरों में
गाली-गाली गा गए

पुष्प-प्रसंग तो छूटे छूटे
शूलों को चमका गए
कैसे भाव और कैसी भाषा
सब चकित हुए चकरा गए

सुन सुन कर हैरान हुए हम
पढ़ पढ़ कर परेशान हुए हम
अपना गुनाह समझ न आया
आहत और अवाक हुए हम

था केवल इक प्रश्न उठाया
पत्थर पत्थर बरसा गए
बोधिवृक्ष की राह क्या पूछी
कुरुक्षेत्र पहुँचा गए


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