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03.14.2015


बबूल एक शाश्वत सत्य है

बबूल एक शाश्वत सत्य है
तब भी था
आज भी है
कल भी होगा

दादू के गाँव में भी उग आया था एक बार
दादू समझदार थे
गाँव के खिदमतगार थे
बबूल की शाखों पर
बबूल के पातों पर
कुल्हाड़ी नहीं चलाते थे
बबूल के तने से तख्त नहीं बनाते थे
तख्त के लिए गाँव नहीं बेच आते थे

जब भी सवाल नन्हें पैरों का आया
उन्होंने एक ही तरीका अपनाया
बबूल की जड़ खोदी
तेल डाला
घर गए
लड़कों को सम्भाला…


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