क्यों करती हो तुम
बार-बार बस एक ही सवाल
आख़िर क्या मायने है
तुम्हारी ज़िन्दगी के
क्यों मिला है तुम्हें ये जन्म
समझाया है मैंने हमेशा तुम को
बनाने वाले ने सब को एक सा बनाया
दिए सब को दो पैर - दो हाथ
एक दिल, दो आँख और एक दिमाग
दी आँखें, देखो दुनिया को
दिया दिमाग, समझो इस को
दिया दिल, करो साहस रखो विश्वास
दिए पैर, हिम्मत कर खड़े होने को
और हाथ, कुछ कर गुज़रने को
फिर क्यों पूछते हो यह बार-बार
नही तो तुम मजलूम
नही हो तुम लाचार
उठो, अगर नही मिलते मायने ज़िन्दगी के
करो कुछ नया सर्जन
और दो खुद के मायने
ज़िन्दगी को अपनी तुम ...