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| 04.28.2007 |
| इंतज़ार अमित शर्मा |
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जो तैश में कर दे तर्रार, गर आने वाल हो महबूब... तन्हाई में भी अक्स उसी का, क्या होगा जब मिलेगी नज़र, पहला जुमला प्यार का क्या रंग पहना होगा उसने, किस इत्र का भाग्य जागा होगा आज, लबों की भीगी नमी का अहसास, हो पल भर का विलम्ब उसके आने में, रुस्वाई से बेवफ़ाई तक का मंज़र, वो ना मिली तो दोजख़ का शगल, पर जब वो आती है, उसके आने पर जो उठी है महक, बार-बार जो होता है मोहब्बत का इक़रार इंतज़ार के इस काफिए में इंतज़ार की बेचैनी जो मिटा दे इंतज़ार के इम्तेहान को सिखा दे इंतज़ार का भी इंतज़ार करा दे इंतज़ार से भी मोहब्बत करा दे इंतज़ार में जीना सिखा दे |
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