अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
इंतज़ार
अमित शर्मा

जो तैश में कर दे तर्रार,
वो है इंतज़ार!

गर आने वाल हो महबूब...
तो सुहाता है इंतज़ार!!

तन्हाई में भी अक्स उसी का,
दिखलाता है इंतज़ार।

क्या होगा जब मिलेगी नज़र,
सोचवाता है इंतज़ार।

पहला जुमला प्यार का
कहलाता है इंतज़ार।

क्या रंग पहना होगा उसने,
झलक दिखलाता है इंतज़ार।

किस इत्र का भाग्य जागा होगा आज,
ये महकाता है इंतज़ार।

लबों की भीगी नमी का अहसास,
कराता है इंतज़ार।

हो पल भर का विलम्ब उसके आने में,
...तो डराता है इंतज़ार।

रुस्वाई से बेवफ़ाई तक का मंज़र,
दिखलाता है इंतज़ार।

वो ना मिली तो दोजख़ का शगल,
महसूस कराता है इंतज़ार।

पर जब वो आती है,
हर शुबह काफूर कराता है इंतज़ार।

उसके आने पर जो उठी है महक,
उसका हकदार है इंतज़ार।

बार-बार जो होता है मोहब्बत का इक़रार
उसके पीछे भी है वो लम्बा इंतज़ार।

इंतज़ार के इस काफिए में
जो छिपा है वो है प्यार!

इंतज़ार की बेचैनी जो मिटा दे
वो है प्यार!

इंतज़ार के इम्तेहान को सिखा दे
वो है प्यार!

इंतज़ार का भी इंतज़ार करा दे
वो है प्यार!

इंतज़ार से भी मोहब्बत करा दे
वो है प्यार!

इंतज़ार में जीना सिखा दे
वो है प्यार!

अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें