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ISSN 2292-9754

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01.14.2016


वो इश्क के क़िस्से

वो इश्क के क़िस्से, पुराने हो गए,
उनसे बिछड़े हमें, ज़माने हो गए।

शमा तो जली इंत्ज़ार में रात भर,
परवाने के झूठे सब, बहाने हो गए।

दिल बहलाने को निकले जाम पीने,
अफ़सोस बन्द सब मयख़ाने हो गए।

बहारों के संग गिरे थे जो पत्ते,
उनसे दूर उनके ठिकाने हो गए।

साथ निभाने को आये जो परिन्दे,
सबसे पहले वो बेगाने हो गए।


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