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| 06.17.2007 |
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भूख अमित कुमार सिंह |
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'भूख’
सुनते ही किसी को
भूख है किसी को
ताकत की उड़ता हुआ
परवाना है। मित्र
‘अमित’
तुम भी नजरें उठा
के सड़क पर
खड़े और आँखों से छलकती भूख को तो देखों! उसकी ये
भूख |
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